अंक अप्रैल 2014
मानव मन सदियों से जिज्ञासाओं की खोज में रहा है। वह अनन्त प्रश्नों की बौछारों से भीगता रहा है,जो चिरंतन आज भी जारी है। वह हर जिज्ञासा में स्वयं की संतुष्टि को तलाशता रहा है। उसके हर समाधान में अतृप्त रह जाने वाली तीक्ष्ण मेद्या पुनः नये मार्गो, नये समाधानों को तलाशती रहती है। सच है, समस्याओं का सागर और ज्ञान के गगनमंडल का इस अखंड लोक में अनंत विस्तार है। इसी कड़ी में वर्तमान परिदृश्य में उभर रही उलझनों और अद्यतन संदर्भो में उत्तरों को रेखांकित करती यह वेब ....
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