अंक अप्रैल 2015
प्रिय पाठकों, आपके हृदयस्पर्शी उदगार सुझाव और समीक्षाओं के साथ 'ज्ञानमंजरी' ने एक वर्ष की परिक्रमा पूरी कर ली। 'ज्ञानमंजरी' का यात्रा-वृतांत वैसा ही रहा, जैसे किसी मार्ग पर चलते पथिक का जीवन अनुभव हो....आरोह और अवरोहों से भरा हुआ। पूर्णतः ज्ञान-विज्ञान पर आधारित होने के बावजूद, हमने इसमें साहित्य की भीनी छीटों से कभी-भी परहेज नहीं किया, ताकि आपकी मंजरी मात्र शुष्क ज्ञान की अभिव्यक्ति का परिचायक बनकर न रह जाए बल्कि रागात्मक ....
इस अंक में ...