अंक मई 2014
"जिस के दिल से माँ की मोहब्बत चली गई....   समझो, उसके हाथ से जन्नत चली गई...."          मनुष्य जन्म से ही रिश्तों के घेरों में घिरा रहता है, उन रिश्तों में सबसे छोटा शब्द रखने वाला रिश्ता "माँ" का है। माँ, शब्द जितना छोटा है, उसका एहसास उतना ही बड़ा। एक ऐसा एहसास, एक ऐसा शब्द, जिसके लिखते ही, बोलते ही, सुनते ही हृदय प्रेम से भर जाता है। चेहरे पर गर्व भरी मुस्कान और एक प्यारी-सी छवि। वो छवि जो जन्म के बाद, प्रथम दृश्या से ही मन- मस्तिष्क में ....
इस अंक में ...