अंक जुलाई 2014
असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो, क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो,  जब तक न सफल हो, नींद चैन त्यागो तुम, संघर्षों का मैदान छोड़ मत भागो तुम। ―हरिवंशराय 'बच्चन' परीक्षाओं का दौर ख़त्म। अब लगभग सभी परीक्षाओं के परिणाम आ चुके हैं। हमारे कर्मफल अब हमारे ही हाथों अपनी गति निर्धारित करने को व्याकुल हो रहे हैं। जो सफल हैं, वो अपने भावी जीवन के नवीन उपागम को सवाँरने में उलझे होंगे, किन्तु जिनके हाथों असफलता लगी, वे स्वाभाविक रूप से निराश ....
इस अंक में ...