अंक दिसम्बर 2014
सुविचार “आपका हृदय ईमान से भरा है तो एक शत्रु क्या, सारा संसार आपके सम्मुख हथियार डाल देगा।” मनुष्य स्वभाव से ही सुखभोगी है,कष्ट में जीना उसे पसंद नहीं। वह हर हाल में सुखी रहना चाहता,कष्ट से उत्पन्न छटपटाहट उसके लिए सदा से असहनीय है। किन्तु हाँ, यहाँ सुख की परिभाषाएँ सब के लिए अलग-अलग हो सकती हैं। कोई स्वयं के सपनों को साकार कर सुख पाता है, तो कोई दूसरों के सपनों को उजाड़ कर सुखी होता है। यहाँ एक प्रश्न, जो किसी भी भलमनसाहत को विचलित ....
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