तुमको खोया भी कहाँ

तुमको खोया भी कहाँ तुमको पाया भी नहीं ।
याद भी आई नहीं तुमको भुलाया भी नहीं ।

रोज लड़ते रहे हम अपने सरोकारों से ।
जिंदगी चलती रही नए नए औजारों से ।
किश्तों में जीते रहे जिंदगी को पाया भी नहीं ।
तुमको खोया भी नहीं.....

सभी अपने हैं तो अहसास पराया क्यों है ।
हर एक रिश्ते पे एक धुंध सा छाया क्यों है ।
रिश्तो में उलझे रहे रिश्ता निभाया भी नहीं ।
तुमको खोया ही नहीं........

जिंदगी ख्वाब है तो ख्वाब की ताबीर है क्या ।
है मुकम्मल भी कहाँ अधूरी तस्वीर है क्या ।
अधबुने खवाब के धांगों को सुलझाया भी नहीं ।
तुमको खोया भी नहीं.......

प्यार तो प्यार है हर शख्स का हक है इस पर ।
सबको मिल जाए सभी ये दुआ है लब पर ।
प्यार में डूबा रहा फिर भी तुम्हे पाया भी नहीं ।
तुमको खोया भी नहीं.........

रोज महफ़िल में रहे और ठहाको में रहे ।
भीड़ में तनहा रहने के सवालों मे रहे ।
जश्न में खोते रहे और जश्न मनाया भी नहीं ।
तुमको खोया भी नहीं.........

तुमको खोया भी नहीं तुमको पाया भी नहीं ।
याद भी आई नहीं तुमको भुलाया भी नहीं ।


लेखक परिचय :
योगेन्द्र कुमार पाठक
फो.नं. ---
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