आयोडीन

मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए आयोडीन बहुत जरुरी है। जो उसे प्रकृति से उपयुक्त मात्रा में मिलती रहती है। लेकिन अब पर्यावरण असंतुलन के कारण वातावरण में आयोडीन की कमी हो गई है जिसके कारण तरह-तरह की बीमारियाँ हो जाती है।
     आयोडीन मिट्टी की निचली सतह में आयोडाइड के रूप में होता है। समुद्र के एक लीटर जल में यह 50 से 60 माइको ग्राम पाया जाता है। वाष्पशील होने के कारण यह वाष्प बनकर हवा में उड़ता रहता है जिसके कारण यह वातावरण की हवा में भी मौजूद रहता है। वर्षा होने के बाद यह पानी में घुलकर पुनः पृथ्वी पर आ जाता है तथा मिट्टी में मिल जाता है। वर्षा तथा बाढ़ आदि के कारण मिट्टी से नमक बहकर नदियों द्वारा समुद्र में पहुँच जाता है।
       एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में 15 से 20 मिली ग्राम आयोडीन पाया जाता है। आयोडीन का अधिकांश भाग गले में पाये जाने वाले थायराइड ग्लैंड में होता है। इसी थायराइड ग्लैंड से हमारे शरीर को थायराक्सीन नामक स्राव प्राप्त होता रहता है। ग्लैंड को थायराक्सीन की उपलब्धता बनाये रखने के लिए प्रतिदिन 60 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्याकता
है। थायराक्सीन की कमी से मानव शरीर में कई रोग हो जाते हैं जिनमें घोंघा, बौनापन, गर्भपात, मरे बच्चे पैदा होना तथा अन्य कई प्रकार की शारीरिक व मानसिक अक्षमताएँ प्रमुख हैं।
     आयोडीन की कमी से पैदा हुए नवजात शिशुओं की मृत्यु दर की आशंकाएँ बढ़ जाती हैं अथवा बच्चे बहुत कमजोर पैदा होते हैं। 
     आयोडीन की कमी से बच्चा अंधा हो सकता है। उसके ठीक से खड़े होने या चलने-फिरने में कठिनाई अथवा अपंगता हो सकती है। बच्चा गूँगा, बहरा अथवा भैंगा हो सकता है।
      स्कूल जाने वाले बच्चों में आयोडीन की कमी के कारण कई प्रकार के विकार पैदा हो सकते हैं। जैसे कि उनका पढ़ने-लिखने में मन नहीं लगता। वे पढ़ाई-लिखाई और खेलकूद में पिछड़ जाते हैं तथा उनके सीखने-समझने की क्षमता कम हो जाती है। इतना ही नहीं, आयोडीन की कमी से बच्चे जीवन भर मंद बुद्धि रह सकते हैं।
      व्यस्क अवस्था में आयोडीन की कमी शरीर में कई प्रकार के विकार पैदा कर देती है। गले का घेंघा बढ़ जाता है। इसकी कमी से पचा हुआ भोजन ऊर्जा में नहीं बदल पाता। जिससे शरीर को पूरी शक्ति नहीं मिलती तथा कार्य करने में थकान अधिक लगती है।
    पशुओं में भी आयोडीन की कमी से कई तरह के नुकसान होते हैं जैसे कि मादा पशुओं की जनन क्षमता कम हो जाती है वे दूध कम देते हैं। पशुओं के शरीर में मांस भी कम हो जाता है। मुर्गियाँ कम अंडे देती हैं। भेड़ों के शरीर में आयोडीन की कमी से ऊन कम बनता है तथा खेतों में काम करने वाले पशुओं की कार्यक्षमता कम हो जाती है।
       आयोडीन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए नमक, पावरोटी, खाद्य तेल तथा पानी जैसे आयोडीनयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है। हमारे देश में इस आयोडीन की कमी को पूरा करने के लिए आयोडीनयुक्त नमक का सेवन सबसे आसान तरीका है। सामान्यतया एक व्यक्ति प्रतिदिन 10 से 15 ग्राम नमक का सेवन करता है और यदि नमक में 75 पीपीएम (प्रति मिलियन में भाग) आयोडीन है तो इसकी न्यूनतम आवश्यकता की पूर्ति की जा सकती है। 


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