सामान्य ज्ञान - नवम्बर 2014 : भूगोल

भारत की मिट्टियाँ:-  भू-गोल की अगली कड़ी में हम अपने पाठकों के लिए भारत भूमि की संरचना और इसकी विशेषता से जुड़ी कई रोचक बातों की चर्चा करेंगे।

  •     पौधे के विकास में सहायक महीन कणयुक्त तथा ह्यमस वाले मेंटल की ऊपरी परत के ढीले पदार्थ को मिट्टी या मृदा कहते हैं।
  •     मिट्टी में मुख्य रूप से शैलकण, खनिज कण, कार्बनिक पदार्थ, जल, वायु एवं जीवाणु पाये जाते हैं।
  •     मिट्टी के कणों का आकार इसकी प्रमुख विशेषता है । मिट्टी के कणों को मिली मीटर में मापा जाता है।
  •     कार्बनिक पदार्थों के सड़ने के बाद जो उत्पाद बच जाता है, वह ह्यूमस कहलाता है। ह्यूमस से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। अलग-अलग प्रकार की मिट्टी में ह्यूमस की मात्र अलग-अलग होती है।
  •     जिस मिट्टी में चूने की मात्र कम होती है, उसे अम्लीय मिट्टी कहते हैं। इसी प्रकार जिस मिट्टी में चुने की मात्र अधिक होती है, उसे क्षारीय मिट्टी कहते हैं । निष्क्रिय मिट्टी का पी.एच.(pH) मान 7.2 होता है। इसी प्रकार अम्लीय मिट्टी का 7.2 या 7.3 से कम होता है एवं क्षारीय मिट्टी का मान 7.3 से अधिक होता है।
  •     भारतीय कृषि एवं अनुसंधान परिषद ने भारत की मिट्टी को कई प्रकारों में बांटा है।
  •     जलोढ़ मिट्टी भारत की सबसे प्रमुख मिट्टी है।यह भारत की कुल मिट्टी का 43.4 प्रतिशत है। यह दो प्रकार की होती है- खादर और बांगर।
  •     मिट्टी का लाल रंग फेरिक आक्साइड के कारण होता है।
  •     काली मिट्टी को भारत में रेगुर और विश्व में चेर्नोजम कहते हैं।
  •     लेटराइट मिट्टी से ईटें तथा मिट्टी के बर्तन बनाए जाते हैं।

लेखक परिचय :
विशाल वर्मा लखनवी
फो.नं. -7836898542
ई-मेल - ccivishdem@gmail.com
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