ज्ञान मंजरी रचना
नेहरू की चाहत गांधी का सपना

खिले फूलों का गुलिस्ता हो भारत ये अपना ,
वो नेहरू की चाहत , वो गांधी का सपना ………………।।
हिन्दू , मुस्लिम , सिख , इसाई एक नूर है एक हैं भाई ,
छोड़ो जाति , धर्म और मजहब की लड़ाई ,
मन से मन ये मिला लो तुम अपना ,
वो नेहरू की चाहत , वो गांधी का सपना ……………………।।
सपनों का भारत , वो सपनों की बातें ,
बहुत याद आतीं हैं वो दिन वो रातें ,
नहीं भूलता है माँ का रोना , बापू का सिसकना ,
वो नेहरू की चाहत , वो गांधी का सपना ………………….।।
हम एक हैं एक भारत है अपना ,
फूलों की सेज पर फिर भी काँटों का चुभना ,
वो नेहरू की चाहत वो गांधी का सपना …………………।।


लेखक परिचय :
विशाल वर्मा लखनवी
फो.नं. -7836898542
ई-मेल - ccivishdem@gmail.com
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