चंद हाइकु

1
ठूंठ का मैत्री
वल्लरी का सहारा
मर के जीया ।
2
साँझ ले आई
नभ- भेजा सिंधौरा
भू मांग भरी ।
3
झटकी बाल
नहाई निशा ज्यूँ ही
ओस छिटके।
4
पीड़ा मिटती
पाते ही स्नेही-स्पर्श
ओस उम्र सी ।
5
बिज्जु की लड़ी
रजतमय सजी
नभ की ड्योढ़ी।
6
सुख के तारे
लूता-जाल से घिरे
तम के तले।

ताँका
1
शीत ढिठाई
स्वर्ण चोरी कर ले
सहमा रवि
दहकता अंगार
हिम को रास्ता दे दे।
2
लूक सहमे
सूर्य-तन में लीन
शीत का धौंस
ठिठुरी या गुलाबी
मानिनी भू रहती।

*मानिनी =गर्भवती
3
चटके रिश्ते
सर्द हवा मिलते
छल – धुंध से
दिल की आग बुझी
बर्फ जमती जाती।


लेखक परिचय :
विभा रानी श्रीवास्तव
फो.नं. ---
ई-मेल - vrani.shrivastava@gmail.com
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