ऊर्जा संरक्षण

ऊर्जा संरक्षण के महत्त्व को ध्यान में रखते हुए, हर वर्ष 14 दिसम्बर को 'ऊर्जा बचत दिवस' मनाया जाता है। इस दिन लोगों को ऊर्जा संरक्षण की दिशा में जागरूक बनाने का काम किया जाता है। जागरूकता तभी संभव है जब हम यह जान लें कि ऊर्जा संरक्षण है क्या? यह हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है? क्या इसके बिना जीवन संभव है? और इसे संरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसकी है? इसके लिए जरुरी है कि हम अपने दायित्व निर्वाह स्वयं करें और दूसरों से अपेक्षाएँ करना छोड़ दें।

आइए पहले ऊर्जा सम्बन्धी कुछ जानकारियाँ ले लें। जैसा हम सभी जानते हैं कि किसी वस्तु के कार्य करने की कुल क्षमता को ही उसकी ऊर्जा कहते हैं और प्रत्येक कार्य को करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है।ऊर्जा न ही नष्ट की जा सकती है और न ही उत्पन्न। ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरण हो सकता है, इसे ही ऊर्जा संरक्षण का नियम कहा जाता है। इस नियम को हेल्महोल्टस नामक वैज्ञानिक ने प्रतिपादित किया था। यदि सभी प्रकार की ऊर्जाओं को ध्यान में रखा जावे तो तो ब्रह्माण्ड में सभी ऊर्जाओं का योग स्थिर रहता है।

संपूर्ण ब्रह्माण्ड में ऊर्जा कई रूपों में विद्यमान है, जैसे― यांत्रिक ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा, प्रकाश ऊर्जा, उष्मीय ऊर्जा, ध्वनि ऊर्जा,विद्युत् ऊर्जा आदि। देश में बढ़ती ऊर्जा की जरुरतों के विपरीत उत्पादन कम हो रहा है। ऊर्जा संरक्षित करने के लिए व इसके सीमित प्रयोग के लिए कुछ उपायों का अनुशरण करना अनिवार्य हो गया है, धन व ऊर्जा की बचत की जा सके। जैसे:-

  • अनावश्यक बिजली के प्रयोग से बचें।
  • पानी को व्यर्थ न बहावें।
  • आई.एस.आई.चिन्हित विद्युत् उपकरणों का प्रयोग करें।
  • संभवतः शादी-विवाह, समारोह आदि के कार्यक्रम दिन में ही रखें, ताकि बिजली की खपत कम हो।
  • अधिक से अधिक वृक्ष लगायें।
  • सोलर कुकर के प्रचलन को बढ़ावा दें।
  • मानव निर्मित संसाधनों की अपेक्षा प्राकृतिक संसाधनों के प्रयोग के चलन को बढ़ावा दें।

ऊर्जा संरक्षण के उपाए तो बहुत हैं किन्तु इस पर अमल करना ज्यादा जरुरी है।यह दिवस हमें अपने कर्तव्य निर्वाह को संकल्पित करने का अवसर देता। यह एक अवसर है कि हम संभल जाएँ, वरना भावी पीढ़ी के लिए कुछ भी बचा पाना मुश्किल होगा।


लेखक परिचय :
मोहम्मद इमरान खान
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