भारत में परमाणु भट्टी के जनक:- डॉ. राजा रमन्ना

डॉ. राजा रमन्ना बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। डॉ. राजा रमन्ना के कुशल नेतृत्व ने भारत को परमाणु बम दिया। डॉ. राजा रमन्ना की सन 1965 से 1968 के दौरान परमाणु विखंडन पर दी गई वैज्ञानिक दृष्टि से भारत अल्प समय में ही विश्व के परमाणु मानचित्र पर छा गया। डॉ. राजा रमन्ना ने अपनी वैज्ञानिक सोच को दिन-ब-दिन परिष्कृत तो किया ही, साथ ही प्रशासनिक स्तर पर कदम बढ़ाते हुए, अनेक उच्च पदों पर रह कर भारत के परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

डॉ. राजा रमन्ना ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव पद पर अपनी बहुमूल्य सेवाएँ दीं। वह रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार रहे। वे राज्यसभा सदस्य रहे और ग्यारह महीने तक केन्द्रीय रक्षा राज्यमंत्री का प्रभार भी संभाला। उन्होंने युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए बेंगलूर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टेडीज की प्रबंधन परिषद् के उपाध्यक्ष, भारतीय विज्ञान संस्थान (बैंगलूर) की प्रशासनिक परिषद् के अध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरु सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च की प्रबंध परिषद् के अध्यक्ष जैसी अनेक जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। उन्हें वैज्ञानिक सलाहकार समिति का सदस्य और फिर अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा आयोग के महानिदेशक पद पर भी कार्य किया और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संगठन के 30 वें महासम्मेलन की अध्यक्षता की।

डॉ. राजा रमन्ना का जन्म 28 जनवरी 1925 में कर्नाटक के तुमकुर गाँव में हुआ। बचपन से ही वे मेधावी छात्र थे। वे पियानो और वायलिन बजाने में माहिर थे। उन्होंने संगीत पर एक पुस्तक लिखी तथा नाटकों, दर्शनशास्त्र, साहित्य आदि में भी उनकी रूचि थी। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय में विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बाद में वह इंगलैंड गए औरलन्दन से 'डॉक्टरेट' की डिग्री हासिल की। स्वदेश वापसी क बाद डॉ. रमन्ना ने डॉ. होमी भाभा के साथ काम शुरू किया जो उन दिनों 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च' में थे। उन्होंने भाभा अनुसन्धान संस्था में रिएक्टर फिजिशिष्ट के रूप में कार्य किय और अपने साथियों के साथ 4 अगस्त 1956 को भारत की पहली परमाणु भट्टी 'अप्सरा' का निर्माण किया। यहाँ उन्होंने परमाणु भट्टी में चल रही न्यूट्रान थर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर शोध प्रबंध प्रस्तुत किया। अप्सरा अणुभट्टी से अनुसंधान के लिए प्रखर ऊष्मा के न्यूट्रान मिले। नाभिकीय, विखंडन का अध्ययन कर रमन्ना और उनके साथियों ने न्यूट्रान और गामा किरणों के ऊर्जा तथा एंग्युलर डिस्ट्रीब्यूशन का सूत्रपात किया। डॉ. राजा रमन्ना को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 24 सितम्बर 2004 को उनका निधन हो गया।


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