प्रेरक विचार जनवरी 2014

विरोध
 प्रत्येक विरोध हमारेउपर काबिज होनेसेपहलेचेतावनी एवं सुलह का एक मौका जरूर देता है।

विस्तार
नयी चीजें शुरूआत मेंअपना पोषण दूसरों से माँगती है लेकिन स्थिरता आ जाने पर अपना विस्तार स्वयं करने लगती है।

आत्मनिर्भरता
आत्मनिर्भरता का एक पाँव अपने केन्द्र में मजबूती से जमा हुआ होता हैऔर दूसरा पाँव नये उद्यमों की तलाश में इसके चारोंओर घूमता हुआ अपने केन्द्र को ही और अधिक मजबूती प्रदान करता रहता है।

अनुभव
अनुभव की असंख्य आँखें होती है, इनसेकोई चीज छुप नहींसकती और न ही बच सकती है।

ऊँचाई
जब हमारेअनुभवोंकी रस्सी मजबूत होती है, हम किसी भी ऊँचाई में मौजूद समस्याओं का हल इसके सहारे कर डालते हैं।

इच्छा
अनगिनत सम्भावनाओं सेभरी हुई है यह दुनिया। प्रत्येक इच्छा को कोई न कोई सम्भावनाएँ सामने खड़ी अवश्य मिलती है।


लेखक परिचय :
डॉ. नरेश अग्रवाल
फो.नं. -+91 9334825981
ई-मेल - smcjsr77@gmail.com
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