असफलता सिर्फ एक सीख है,न कि जीवन का अंत

अपने जीवन में चल रही असफलता के दौर से तंग आकर एक युवक आत्महत्या करने जा रहा था |
जब वो गहरी खाई में कूदने जा रहा था तो रास्ते से गुजर रहे एक किसान की नज़र उस पर पड़ी |
किसान युवक को खाई की ओर जाते देखकर जोर से चिल्लाया ,'' अरे अरे बच्चे , क्या कर रहे हो ? खाई के नीचे गहरी नदी है , उधर मत जाओ | गिर जाओगे , मर जाओगे |''
युवक ने चिल्लाते , झल्लाते हुए कहा , '' हाँ मरने ही तो जा रहा हूँ , मुझे मत रोको | ''
किसान ने उससे आत्महत्या करने का कारण पूछा |
युवक ने कहा , '' मैं ज़िन्दगी से तंग आ चुका हूँ | नौकरी के लिए दर दर भटक रहा हूँ , पर मुझे कहीं नौकरी नहीं मिली | ऐसे में तो मेरी पूरी पढ़ाई बेकार चली जायेगी |''
तब तक किसान उस युवक के पास आ चुका था |
उसने शांत भाव से युवक के काँधे पर हाथ रखा और पूछा , '' कितने साल पढ़ाई की है तुमने ?
'' अठारह साल '' , युवक ने लगभग बिलखते हुए जवाब दिया |
'' भाई , ये तो सही है कि तुम्हारे अठारह साल की पढ़ाई तुम्हारे किसी काम ना आई तो तुम आत्महत्या कर रहे हो , पर    तुम्हारे माँ बाप ने तो बाइस साल तक तुम्हारा लालन पालन किया | अब अगर तुम आत्महत्या कर लोगे तो उनकी बाइस साल की मेहनत बेकार हो जायेगी | तो क्या उन्हें भी आत्महत्या करनी पड़ेगी ? ''
युवक के पास अब कोई जवाब नहीं था |
उसने आत्महत्या करने का इरादा बदल दिया और दौड़ते हुए अपने घर की तरफ भागा |


लेखक परिचय :
कल्याणी कबीर
फो.नं. ---
ई-मेल - kalyani.kabir@gmail.com
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