संवाद

जब हो जाता है बंद संवाद
मनुष्यों से
तो चल पड़ता है वह
जंगलों में
चाह नहीं उसे बुद्ध बनने की
वह तो चाहता है अब
जानवरों को दोस्त बनाना
सीखना वहाँ के तौर-तरीके
जो सीखाते हैं
संघर्ष करना और जीना
इस जंगल-राज में
पर होते हैं कई मौनी-बाबा भी
जो अपनाते हैं मध्यम मार्ग
बंद कर देते हैं
मनुष्यों से वार्तालाप
और पाल लेते हैं
कुत्ता, बिल्ली, या वैसा ही कुछ
ताकि संवाद जारी रहे


लेखक परिचय :
अमिताभ विक्रम द्विवेदी
फो.नं. ---
ई-मेल - amitabhvikram@yahoo.co.in
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