गरीब

लड़का और एक लड़की
उम्र का कोई पता नहीं
उनकी त्वचा से उम्र का पता नहीं चल रहा था
कपड़े थे
गंदे
पर दाग अच्छे थे
जैसे कि एक गरीब के होने चाहिए
मांग रहे थे
अपने जीने का हक
अठन्नी, रुपया, दो रुपया
उन्हें देख कोई सिकोड़ता था
मुंह
तो कोई अपनी जेब
कोई देना चाहता था बिना भेदभाव किये
“चोकलेट” और करना चाहता था
“चोकलेटबाजी”
वे भूखे थे
उन्हें नहीं पता था
आत्मा और परमात्मा के बारे में
उन्हें नहीं पता था
माता-पिता के बारे में
वे दुनिया में अकेले थे
उन्हें किसी से मोह नहीं था
उन्हें सिर्फ भूख लगी थी
वे नंगे नहीं थे
बस भूखे थे


लेखक परिचय :
अमिताभ विक्रम द्विवेदी
फो.नं. ---
ई-मेल - amitabhvikram@yahoo.co.in
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