मई 2014 : प्रेरक विचार
  1. मनुष्य विश्व में सबसे श्रेष्ठ प्राणी है। उसको कठिन से कठिन परिस्थितियाँ भी भयभीत करने में समर्थ नहीं है। यदि मनुष्य विपत्ति के समय घबराए नहीं और शक्ति व संयम रखे तथा अपने मन को स्वस्थ और बलिष्ठ बनाए तो विजय पा सकता है।
  2.  यदि मनुष्य अपने मन पर अंकुश रख पाने में समर्थ हो तो निराशापूर्ण विचारों को मोड़ना अति सुगम है। प्रत्येक दिन हमारे लिए शुभ और उत्तम है। जो व्यक्ति ऐसा सोचने में विश्वास रखते हैं, उनका ही जीवन सुख व समृद्धि से परिपूर्ण होता है।
  3.  जैसा हम बोते हैं, वैसा ही फसल काटते हैं। बबूल का पेड़ बोकर आम प्राप्त नहीं कर सकते हैं। इसलिए मनुष्य को चाहिए मन में घृणा, द्वेष, स्पर्द्धा और बदले की भावना जैसे विचारों को उत्पन्न ही न होने दें। ऐसी भावनाएँ जन्म लेकर शांति और संयम को नष्ट कर मनुष्य को कुंठित और ईर्ष्यालु बना देती है।
  4. मनुष्य उस समय पराजित हो जाता है, जब वह मन से पराजय को स्वीकार कर लेता है। वही व्यक्ति विजय प्राप्त करता है, जो अपनी विजय में विश्वास रखता है। सुखमय जीवन के लिए व्यर्थ की चिंताओं को मन में स्थान न दें। जो भी कार्य आरम्भ करें, उसे पूरी लगन, निष्ठा व साहस और धैर्य सहित पूरा करने में जुट जाएँ। कल्पित संकट के आगमन से भयभीत होकर धीरज मत छोड़ें।
  5.  स्वयं पर भरोसा रखो और अपनी कार्य करने की क्षमता को पहचानो। प्रथम सीढ़ी से कार्य आरम्भ करके उन्नति करते हुए ऊपर की ओर चढ़ते-बढ़ते हुए सफलता प्राप्त करनी चाहिए। बिना किसी अनुभव को प्राप्त किए मनुष्य में ऊँचा उठने की प्रतिभा नहीं होती है।

लेखक परिचय :
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