वक्त भी एक नदी की तरह है ,,,,,
यूँ तो वक्त भी एक नदी की तरह है . जिस तरह नदी की बूँदों को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता उसी तरह वक्त की लहर को भी दिन , हफ्ते और सालों में बाँट कर नहीं देख सकते . पर अब जबकि ये परिपाटी हमारे देश में भी है कि हम नए साल का स्वागत करें और बीते साल को पुराने कैलेंडरों की तहों में लपेट कर भूल सकें तो ऐसा ही सही . पर हम इतना तो कर ही सकते हैं कि कड़वी यादों को भूल जाएँ और बीते साल की अच्छी यादें , अच्छे लोग और अच्छे अनुभवों का हाथ थाम कर आने वाले साल में प्रवेश करें .ठीक उसी तरह जिस तरह से कंप्यूटर के डेस्कटॉप की करप्ट फ़ाइल को हम डिलीट कर देते हैं . पर कुछ ऐसे अनुभव जो आने वाले साल में भी हमें रास्ता दिखा सकती हैं उन्हें दिमाग के सी पी यू में सहेज कर साथ में रखें .
अपने सारे अनुभवों को यदि तिलांजलि दे देंगे तो संभावना है कि हम आने वाले साल में भी अपनी बीती गलतियों को दुहराएँगे . ऐसा ना हो , इसलिए इस नए साल के सफर पर जाने से पहले अपने दिमाग के ब्रीफकेस में क्या रखना है और क्या इस सफर पर नहीं ले जाना है ये तय कर लें तो अच्छा !! हम में से कुछ नए संकल्प भी लेते हैं , नई उम्मीद , नए जोश से भर जाते हैं जब साल की पहली तारीख पास आती है .यह अच्छी बात है . खुशियाँ मनाने , मुस्कुराने के बहाने कोई भी हों तो ठीक है , अगर दूसरों को तकलीफ न पहुँचे . पर हमारे युवा वर्ग यह कोशिश भी करें कि इस ख़ुशी में उनके साथ उनके परिवार के लोग भी शामिल हों , साथ रहें . महज दोस्त- यारों के साथ बाहर वक्त बीताकर , पार्टी मनाकर नए साल का खुशामदीद करना गलत होगा . परिवार भी हम सबों के जीवन का अहम हिस्सा है . आखिर साल के बाकी दिन तो घर के लोग ही हमारा साथ देते हैं तो साल के पहले दिन उन्हें इग्नोर ना करें .
