हम शिक्षक भावी भारत के
हम शिक्षक भावी भारत के
नित नव प्रज्ञा उपजायेंगे
ज्ञान कृषि की फसलों पर
हम अमृत रस बरसायेंगे।
भारत की पावन गरिमा को
अक्षुण्ण हमेशा रखना है
मानवता के अरमानों को
सबमें प्रेरित करना है।
त्याग , प्रेम, बलिदान, समर्पण
निज भारत को ही सब अर्पण
इन भावों की सौगातों से
होगा भारत माँ का तर्पण ।
नवपीढ़ी के कर्णधारों को
हम सच्ची राह दिखायेंगे
क्या है नाता अध्यापक का
छात्रों से, हम ही बतायेंगे ।
हम अपनी रग के ज्ञान तंतु को
कुछ यूँ प्रेषित कर जायेंगें
भावी युग की समृद्धि का
बीजारोपण कर जायेंगे ।
है लगन विकास-बुलंदी से
भारत का भविष्य सुनहरा हो
ज्ञान-ज्योति का उजाला फैले
ना अज्ञान का पहरा हो ।
शिक्षक हैं हम शिक्षा को ही
अपना धर्म बनायेंगें
कोने-कोने खोज-खोजकर
आगे प्रतिभा लायेंगे ।
धीर-वीर-गंभीर मनुज बन
जो कर्तव्यनिष्ठ हो जायेंगें
इन पदचिह्नों पर चलकर वे
फिर "महावीर" कहलायेंगे ।।
