ISSN 2350-1014

ऐसा क्यों होता है?

प्र.1:- पीले फास्फोरस को पानी में रखा जाता है। क्यों? और इसे लाल फास्फोरस में कैसे बदला जा सकता है?

 उत्तर:- पीले फास्फोरस का ज्वलनांक बहुत कम (34°C) होता है। यह बहुत क्रियाशील तत्व है, जो वायु में जलकर अपना ऑक्साइड बनाता है, इसलिए इसे पानी में रखा जाता है। पीले से लाल फास्फोरस बनाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड या नाइट्रोजन की उपस्थिति में पीले फास्फोरस को 250°C पर गर्म करना होता है।

 

प्र.2:- भीगा शरीर तौलिए से पोंछने पर जल्दी सूख जाता है। क्यों?

उत्तर:- तौलिए में असंख्य छिद्र होते हैं, जो केशनली की तरह कार्य करते हैं। भीगे शरीर जो जब हम तौलिए से पोंछते हैं तब यह जल इस छिद्र में सोख लिया जाता है। जिस कारण तौलिए से पोंछने पर शरीर जल्दी सूख जाता है।

 

प्र.3:- साधारण नमक कभी-कभी रंगहीन होने के स्थान पर पीला दिखता है, क्यों?

उत्तर:- साधारण नमक (NaCL) एक आयनिक यौगिक है जिसमें ऋणायन का खाली स्थान कुल घनात्मक आवेश को बढ़ा देता है। एक इलेक्ट्रान इस स्थान पर चलकर आ सकता है। इस प्रकार के दोष की उपस्थिति में रंगहीन क्रिस्टल रंगीन दिखायी पड़ते हैं। ये  F-केंद्र के समान होते हैं। इसलिए नमक कभी-कभी रंगहीन होने के स्थान पर पिला दिखाई देने लगता है।

 

प्र.4:- पुरानी बिल्डिंग के 'विन्डो ग्लास' दुधिया (Millky) दिखायी पड़ते हैं, क्यों?

उत्तर:- दिन में काँच गर्म हो जाता है तथा रात में ठंडा हो जाता है। इस प्रकार एनीलिंग (Annealing) की क्रिया होती है। एनीलिंग के कारण कई वर्षो में काँच में क्रिस्टलीय गुण उत्पन्न हो जाता है तथा 'विन्डो ग्लास' दुधिया रंग के दिखाई पड़ते हैं।

 

प्र.5:- शक्कर के विलयन की अपेक्षा नमक के विलयन की चालकता उच्च होती है। क्यों?

उत्तर:- चूँकि नमक विद्युत् अपघट्य है जो विलयन में आयनित होता है और आयन ही विलयन की विद्युत् चालकता को बढ़ाने हैं जबकि शक्कर विद्युत् अनअपघट्य होने के कारण आपतित नहीं होती है जिससे शक्कर के विलयन की चालकता निम्न होती है।


लेखक परिचय :
मोहम्मद इमरान खान
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