ISSN 2350-1014

स्त्री

एक अनवरत संघर्ष
जिसके साथ जूझ रही है
हर सुबह हर शाम
वो जलकर जी रही है
उम्मीद की किरण लिए
सफलता की आस लिए
जीती जा रही है
लेकिन अपनों से ही
छली जा रही है
ममता, प्यार व स्नेह की मूर्ति वो
सहन करती है समय के थपेड़े वो
जी को जलाकर सुकून देती है जिन्हें
मंजिल पाने के लिए बढ़ती जा रही है
लेकिन अपनों से ही
छली जा रही है


लेखक परिचय :
लक्ष्मी जैन
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