गीत
देखो पापा!
दूर पहाड़ी पर बैठी
इक चिड़िया गाती
देख-देख के हरियाली
वो इठलाती है
सृष्टि के मनोरम दृश्यों
पे मुस्काती है
हौले-हौले गुनगुन करती
कुछ कह जाती
देखो पापा!
दूर पहाड़ी पर बैठी
इक चिड़िया गाती
झर-झर बहते झरनों में
संगीत बसा है
सन-सन चलती पवन ने
कोई गीत लिखा है
इन गीतों, मधुरम तानों को
हम तक पहुँचाती
देखो पापा!
दूर पहाड़ी पर बैठी
इक चिड़िया गाती
देखो वे जो लगे हुए हैं
टॉवर से कुछ
कितने बौने हैं परबत के
आगे सचमुच
इनको ये अहसास दिलाकर
ख़ूब चिढ़ाती
देखो पापा!
दूर पहाड़ी पर बैठी
इक चिड़िया गाती
टेढ़ी-मेढ़ी बहती जाती ये
नदिया रानी
ऊँचे परबत और हवाओं
की मनमानी
सपना है या एक हक़ीक़त
परख न पाती
देखो पापा!
दूर पहाड़ी पर बैठी
इक चिड़िया गाती
- अनमोल
