बाल कविता : चलो कहीं घूम कर आये....
मथुरा, दिल्ली और आगरा,
तुमको ताजमहल दिखलायें।
चलो कहीं घूम कर आयें।।
अगर चलो तुम हरिद्वार तो,
तुमको गंगा जी नहलायें।
सब धामों की सैर करायें,
लक्ष्मण झूला तुम्हें झुलायें।
चलो कहीं घूम कर आयें।।
चलो, चलें फिर दिल्ली घूमें,
देश-हृदय की बात बतायें।
लाल किला व जामा-मस्जिद,
तुमको सब स्थान घुमायें।
चलो कहीं घूम कर आयें।।
राजस्थानी वीर-भूमि के,
तुमको सारे राज बतायें।
गुफा अजंता घूम-घाम कर,
फिर वापस घर को आ जायें।
चलो कहीं घूम कर आयें।।
