ज्ञान मंजरी रचना
तिरिया से राज छिपे न छिपाए

किसी गाँव में एक पति-पत्नी बड़े प्रेम से रहते थे। दोनों को एक-दूसरे पर पूरा-पूरा विश्वास था। पत्नी के प्रेम के कारण पति अपने घरवालों से अलग हो गया था। पति यह जानता था कि उसके माता-पिता बहुत सीधे हैं लेकिन फिर भी वह अपनी पत्नी के लिए उनसे लड़ता था। वह हमेशा ही अपनी पत्नी का पक्ष लेता था। विशेष बात को भी वह माता-पिता, भाई-बहन को न बताकर सिर्फ अपनी पत्नी को ही बताता था।
       एक दिन वह घूमता हुआ गाँव के काका के पास गया। काका बहुत ही अनुभवी व्यक्ति थे। उसने काका से अपनी पत्नी की प्रशंसा की। उसने काका को बताया कि ‛बड़े-से-बड़े राज भी वह अपनी पत्नी से नहीं छिपाता, वह पूरे घर को शक की नज़र से देख सकता है लेकिन अपनी पत्नी पर कभी शक नहीं करेगा।’
       उसके चुप होने के बाद काका ने कहा―‘देखो बेटा, अपनी पत्नी पर जरुरत से ज्यादा विश्वास करना 

ठीक नहीं है। पहले अपनी पत्नी की परीक्षा लेकर देखो फिर तुम्हें पता चलेगा कि वह कितनी राज की बात छिपा सकती है। कभी-कभी सच्चा प्रेम करने वाली स्त्रियाँ भी नासमझी में अपने पति की भलाई करने के चक्कर में उनका अहित कर बैठती हैं।’
       काका की बात सुनकर वह व्याकुल हो गया और उसने अपनी पत्नी की परीक्षा लेने का निश्चय कर लिया। उसने काका की सलाह से एक योजना भी बना ली। 
         एक दिन वह अंगोछे में कटा हुआ तरबूज लेकर आया। उसमें से लाल बुँदे टपक रही थीं। उसने अपनी पत्नी से कहा―‛ आज मैंने एक आदमी का सिर काट दिया। इस बात को राज ही रखना। यदि गाँव में यह बात किसी को पता चल गई तो पुलिस मुझे पकड़कर ले जाएगी और मुझे फाँसी की सजा मिलेगी।’
        उसने अपनी पत्नी से फावड़ा माँगा और घर के पीछे एक पेड़ अंगोछे में लिपटे हुए तरबूज को गड्ढा खोदकर जल्दी से दबा दिया और ऊपर से मिट्टी डालकर जगह को समतल बना दिया।
         उसकी पत्नी इस घटना के बाद परेशान रहने लगी। उसने अपने पति से कुछ नहीं कहा लेकिन उसे अन्दर-ही-अन्दर बहुत घुटन महसूस हो रही थी। वह अपने मन के बोझ को किसी से कहकर हल्का करना चाहती थी। दुःखी हो कर उसने यह बात अपनी पड़ोसन को बता दी। उसने पड़ोसन को कसम दी कि वह इस बात को किसी को न बताए वरना उसके पति को फाँसी हो जाएगी।
        उस महिला ने यह बात अपनी पड़ोसन को बता दी। यह बात एक ने दूसरे को, दूसरे ने तीसरे को, तीसरे ने चौथे को बता दी। इस प्रकार यह बात पूरे गाँव में फैलते-फैलते पुलिस-थाने में भी पहुँच गई।
       दूसरे दिन दरोगा साहब कुछ सिपाहियों को लेकर उसके घर पहुँच गए। दरोगा ने उसकी पत्नी से पूछा―‘जल्दी बताओ कि तुम्हारे पति ने सिर कहाँ पर दबाया है? यदि तुमने सच-सच नहीं बताया तो तुम्हें फाँसी लग जाएगी।’
       दरोगा की डांट सुन कर उसकी पत्नी डर गई वह स्थान दिखा दिया जहाँ पर उसके पति ने गड्ढा खोदकर कुछ दबाया था। पुलिस ने उस स्थान को खोदकर अंगोछे में लिपटा हुआ तरबूज निकाल लिया।
        वहाँ पर काका भी उपस्थित थे। उन्होंने पुलिस को बता दिया कि इसने अपनी पत्नी की परीक्षा लेने के लिए ही यह नाटक किया था। इसके बाद सब लोग अपने-अपने घर चले गए। काकाजी ने कहा कि तिरिया से राज छिपे न छिपाए।

शिक्षा―स्त्रियाँ अपने मन के राज को नहीं छिपा पातीं 


लेखक परिचय :
संपादक
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