कैमरे की नज़र से

कैमरे की नज़र से" नाम से पाठकों को आभास हो गया होगा कि इस स्तम्भ में कुछ न कुछ तो कैमरे का कमाल होगा। जी हाँ! हम इस स्तम्भ में, उन पाठकों का सादर आमन्त्रण करते हैं, जिन्हें कुछ विशेष क्लिप्स लेना का शौक है। आप अपने इस शौक को हमारी जानकारी में तब्दील कर सकते हैं। जरुरत है, बस कुछ शानदार पिक्चरस और उससे सम्बंधित जानकारी की। आप अपने द्वारा खिंची गयी तस्वीर, उस तस्वीर से सम्बंधित जानकारी, साथ ही अपना फोटो, परिचय व कार्यों के बारे में भी लिखें। आप हमें सारी जानकारी imrankhanonnet@gmail.com पर प्रेषित करें।


1. प्रकृति की चित्रकारी- सबसे अद्भुत

[ जून-जुलाई 2015 संयुक्त अंक | मोहम्मद इमरान खान द्वारा लिखित ]
कितनी मेहनत करके कोई चित्रकार एक चित्र बनाता है, कितने रंगों के मिश्रण के बाद उसे वह रंग नजर आता जिसे वह उकेरना चाहता है| कई बार हफ़्तों तक लगा रहता किसी खास भाव को रंगों के माध्यम से प्रस्तुत करने में .... पर जरा गौर से देखे तो यह काम प्रकृति कितने प्राकृतिक तरीके से करती है ..... बारिश का .....
आगे पढ़ें ...

2. कैमरे की नजर से : मई 2015

[ मई 2015 | प्रीति "अज्ञात" द्वारा लिखित ]
बेतुकी इक धुन  काग़ज़ों में लिपटी गीली, बैरंग उदासियाँ गुमशुदा-से स्वप्न लंबी इक डगर सूना, अनजान सफ़र  कुछ शब्द अन-उकरे काले बादलों में संघनित भरे  कुछ शुष्क हो, चरमराए समय की चिलचिलाती धूप में कुछ वाष्पित हो,  ढूँढा किए अपने निशाँ उसी गहरे .....
आगे पढ़ें ...

3. हस्ताक्षर

[ अप्रैल 2015 | बलजीत सिंह द्वारा लिखित ]
कहते हैं हर व्यक्ति का अपना एक पसंदीदा स्थान होता है जहाँ प्राय: भ्रमण कर वह अपने गहरे एकांत को व्यंजना देता है लेकिन मुझे तो अंजान शहरों की गलियों में स्नेह और प्रीति का आधार दिखता है। लेकिन जीवन में दबे पैर चली आई वयस्तता को हंकाल पाना मेरे लिए टेढ़ी खीर साबित हुआ है। .....
आगे पढ़ें ...

4. मुझमें भी....एक सूरज

[ अप्रैल 2015 | प्रीति "अज्ञात" द्वारा लिखित ]
रोज सुबह बिन बुलाए सरक आता है खिड़की में से उगने लगती हैं उम्मीदें फैलने लगती हैं अनायास ही मन के आँगन में उसकी जड़ें घर में जगमगाती रोशनी की तरह चमक उठता है चेहरा मेरा फूल भी तो बेशरम-से बेझिझक खिल .....
आगे पढ़ें ...

5. एक बचपन अभी भी है वहां !

[ मार्च 2015 | प्रीति "अज्ञात" द्वारा लिखित ]
ये तस्वीर, मेरी पसंदीदा तस्वीरों में से एक है। 5-6 वर्ष पूर्व की बात है, मैं सपरिवार राजस्थान यात्रा पर निकली थी, तभी जोधपुर जाने का भी संयोग बना ! वहाँ किले के बाहर बैठे, एक हँसते-गाते परिवार को देखकर क़दम वहीँ ठहर गए ! आदतानुसार, उनसे थोड़ी बातें कीं तो पता चला कि मुखिया का नाम .....
आगे पढ़ें ...

6. कैमरे की नज़र से-फरवरी 2015

[ फरवरी 2015 | प्रीति "अज्ञात" द्वारा लिखित ]
कहते है, फ़रवरी 'प्रेम' का महीना है। कुछ के लिए ये बेहद ख़ास और कुछ के लिए उतना ही उदास ! जिसने पाया, वो गुनगुनाया और जिसने खोया, वो रोया ! दोष, क़िस्मत का या मन का ? सच, जीवन कितना सरल होता, अगर ये इच्छाओं और अपेक्षाओं की चपेट में न आया होता ! पर, वो 'जीवन' ही क्या..जो सरल रहा ! .....
आगे पढ़ें ...

7. साल का प्रथम दिन

[ जनवरी 2015 | प्रीति "अज्ञात" द्वारा लिखित ]
नव-वर्ष  नया दिन  साल का प्रथम दिन  नई शुरुआत ! पर किसकी ? जीवन वही  लोग वही  समाज वही  जीने की शर्तें वही  सोच वही  कुंठाएं वही  माह भी वही  और उनमें शामिल दिनों की  गिनती भी ? उफ़्फ़… वही !  तो इस 'नव-वर्ष ' में  उम्मीद .....
आगे पढ़ें ...

8. प्रतिबिम्ब

[ दिसम्बर 2014 | प्रीति "अज्ञात" द्वारा लिखित ]
पंछी अपने-अपने घोंसलों में दुबके हुए, कुछ अलसायी, रंगीन नावें अब तक किनारों के दामन से लिपटी हुईं । वाहनों की चिल्लपों, सड़कों पर आवाजाही में भी थोड़ा वक़्त है अभी !  कुछ ही पलों में ये नज़ारा बदल जाएगा । झील से सटी उन् बेंचों पर नए जोड़े भविष्य की कल्पनाओं में खो जाएंगे , कुछ पंछी .....
आगे पढ़ें ...

9. सुबह.....हुई है अभी

[ नवम्बर 2014 | प्रीति "अज्ञात" द्वारा लिखित ]
एक सुबह हुई है अभीरात की गुमसुम कलियाँखिलखिला रहीं बेवजहचाँद भी बत्ती बुझासो गया पाँव पसारेअठखेलियाँ करते थक चुकेटिमटिमाते सारे तारेनर्म घास के बिछौने परखुद ही लुढ़क गयाठहरा हुआ आलसी मोतीशरमाती हुई हौले-सेझांकने लगी लालिमाया कि आती रश्मियों को .....
आगे पढ़ें ...

10. खूबसूरत राहें

[ अक्टूबर 2014 | प्रीति "अज्ञात" द्वारा लिखित ]
एक सीधा, खूबसूरत, हरियाली से आच्छादित रास्ता, कि जिसे देख उम्र-भर चलते रहने का ही मन करे ! मंज़िल तक पहुँचने के बाद, पाने के लिए और बचता भी क्या है ! दु:ख तब होता है, जब इन्हीं सुंदर राहों पर अचानक ही कोई घुमावदार मोड़ आ जाए. ऐसे में ये लाचार, बेबस मन, भौंचक्का-सा आँखें फाडे जीवन की .....
आगे पढ़ें ...

11. प्रीति अज्ञात के फोटो

[ सितम्बर 2014 | प्रीति "अज्ञात" द्वारा लिखित ]
शाम की अपनी कहानी है....सारे दिन की व्यस्तता और मन की बेवजह उड़ान एक अनचाही-सी थकान पैदा कर देती है. हृदय की धड़कन, अभी सुस्त है, पर रुकी नहीं. लेकिन फिर भी मन निढाल-सा, मायूस हो ठहर जाता है कहीं ! ये कैसा इंतज़ार है, जो थमता ही नहीं ! हर उदास शाम, यूँ ही बैठ जाना और सुबह होते ही, अचानक .....
आगे पढ़ें ...

12. पर्यटन स्थल माउंट आबू

[ अगस्त 2014 | के. पी. अनमोल द्वारा लिखित ]
माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है। माउंट आबू को राजस्थान का स्वर्ग भी माना जाता है। बरसात के मौसम में इनकी छटा देखते ही बनती है। माउंट आबू में अनेक पर्यटन स्थल हैं। इनमें से कुछ आपके लिये .....
आगे पढ़ें ...

13. रोहतासगढ़ का किला

[ जुलाई 2014 | संपादक द्वारा लिखित ]
1. रोहतासगढ़ का किला  2. रोहतासगढ़ का मकबरा  3. रोहतास का गणेश मन्दिर  4. रोहतास का झरना मेरा गाँव रोहतास (बिहार)। यह सोन नदी के .....
आगे पढ़ें ...
इस अंक में ...