कहावतों की कहानी

जब कोई नीतिपूर्ण बात या जीवन की सत्यता को व्यक्त करने वाली बात आम प्रयोग में प्रचलित हो जाती है, तब वह कहावत कहलाती है। कहावत को लोकोक्ति भी कहते हैं। लोकोक्ति का शाब्दिक अर्थ है-
लोक+ उक्ति = संसार का कथन या दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं लोक प्रचलित उक्ति
लोक-साहित्य में कहावतों का विशेष महत्त्व है। कहावतों से सम्बंधित अनेकों कहानियाँ भी प्रचलित हैं, जिनका उद्देश्य कभी नहीं बदलता। प्रस्तुत स्तम्भ में हमने कहावतों पर आधारित कहानियों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इसके पीछे हमारा उद्देश्य पाठकों को कहावतों को भलीभांति समझ कर उसका प्रयोग करवाना है। इस स्तम्भ को तैयार करने में हमें अनेक पुस्तकों का सहयोग लेना पड़ा,इस के लिए मैं उनका आभार व्यक्त करना चाहती हूँ। अंततः मैं बस यही कहना चाहूँगी कि ये स्तम्भ प्रत्येक पाठक वर्ग के लिए शिक्षाप्रद व उपयोगी सिद्ध होगी।


1. एक तीर से दो शिकार

[ जून-जुलाई 2015 संयुक्त अंक | संपादक द्वारा लिखित ]
        तेनालीराम विजयनगर के महाराज कृष्णदेव राय के प्रमुख दरबारियों में से एक थे। वे बहुत ही विद्वान थे। एक दिन किसी कार्य से उन्हें शाम को घर लौटने में देर हो गई। जब वे घर जा रहे थे तो उन्होंने कुछ लोगों को बातें करते हुए सुना। वे कह रहे थे -'हम तो बहुत गरीब हैं और तेनालीराम बहुत अमीर है लेकिन कल जब हम .....
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2. अढ़ाई दिन की बादशाहत

[ मई 2015 | संपादक द्वारा लिखित ]
        बक्सर के मैदान में एक बार हुमायूँ और शेरशाह सूरी का घमासान युद्ध चल रहा था। युद्ध में हुमायूँ बुरी तरह हार गया और उसे शेरशाह सूरी की सेना ने तीनों से घेर लिया। हुमायूँ अपनी जान बचाने के लिए युद्ध के मैदान से भागकर गंगा के किनारे आ पहुँचा। हुमायूँ ने अपने घोड़े को गंगा के अन्दर उतारने की बहुत .....
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3. बुरे का अंत बुरा

[ अप्रैल 2015 | संपादक द्वारा लिखित ]
        किसी जंगल में चार चोर रहते थे। वे चारों मिलकर चोरी करते   और जो भी सामान उनके हाथ लगता उसे आपस में बराबर-बराबर बाँट लेते थे। वैसे तो वे चारों एक-दूसरे के प्रति प्रेम प्रकट करते थे, किन्तु मन-ही-मन एक-दूसरे से ईर्ष्या करते थे। वे चारों अपने मन में यही सोचते थे कि यदि किसी दिन मोटा माल मिल जाए तो वह .....
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4. कानून सबके के लिए बराबर है

[ मार्च 2015 | संपादक द्वारा लिखित ]
शहंशाह बहुत न्यायप्रिय शासक थे। उन्होंने अपने महल के प्रवेशद्वार पर एक घंटा लगवा दिया था। जिसको भी शिकायत हो वह उस घंटे को बजा सकता था ताकि शहंशाह आवाज को सुनकर न्याय कर सकें। उनके राज्य में गरीब-अमीर, छोटे-बड़े सबसे साथ न्याय किया जाता था। शहंशाह की दृष्टि में कानून सबके लिए बराबर था। शहंशाह अपराधी को .....
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5. जो कुआँ खोदता है वही गिरता है

[ फरवरी 2015 | संपादक द्वारा लिखित ]
एक बादशाह के महल की चहारदीवारी के अन्दर एक वजीर और एक कारिंदा रहता था। वजीर और कारिंदे के पुत्र में गहरी दोस्ती थी। हम उम्र होने के कारण दोनों एक साथ पढ़ते, खेलते थे। वजीर के कहने पर कारिंदे का लड़का उसके सब काम कर देता था। वह वजीर को चाचा कहकर पुकारता था। बादशाह कारिंदे के पुत्र को बहुत प्रेम करता था। .....
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6. देखना है ऊँट किस करवट बैठता है

[ जनवरी 2015 | संपादक द्वारा लिखित ]
एक गाँव में सप्ताह में एक बार हाट लगती थी। दाल, सब्जी, अनाज, कपड़े यानि घर-गृहस्थी का सारा सामान उस हाट में मिल जाता था। आस-पास के गाँवों से भी लोग उस हाट से सामान खरीदने आते थे। दुकानदार हाट में बेचने के लिए अपना सामान बैलगाड़ी, ऊँट,खच्चर पर लादकर लाते थे। छोटे-छोटे दुकानदार तो .....
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7. तेते पाँव पसारिए, जेती लांबी सौर

[ दिसम्बर 2014 | संपादक द्वारा लिखित ]
अकबर के दरबारियों में बीरबल का नाम सबसे पहले लिया जाता है। अकबर-बीरबल का बहुत सम्मान करते थे और उन्हें मित्र के समान ही समझते थे। दोनों में इतना प्रेम था कि वे एक-दूसरे के कहे गए व्यंग्य का भी बुरा नहीं मानते थे। यदि बीरबल नाराज हो जाते तो अकबर बादशाह होते हुए भी उन्हें मना ही लेते थे। अकबर राजकार्यो में .....
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8. तिरिया से राज छिपे न छिपाए

[ नवम्बर 2014 | संपादक द्वारा लिखित ]
किसी गाँव में एक पति-पत्नी बड़े प्रेम से रहते थे। दोनों को एक-दूसरे पर पूरा-पूरा विश्वास था। पत्नी के प्रेम के कारण पति अपने घरवालों से अलग हो गया था। पति यह जानता था कि उसके माता-पिता बहुत सीधे हैं लेकिन फिर भी वह अपनी पत्नी के लिए उनसे लड़ता था। वह हमेशा ही अपनी पत्नी का पक्ष लेता .....
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9. सत्यमेव जयते

[ अक्टूबर 2014 | संपादक द्वारा लिखित ]
  इस संसार में राजा हरिश्चन्द्र का नाम कौन नहीं जानता। वे बहुत ही उदार हृदय और दयालु थे। वे अपने जीवन से अधिक सच्चाई और ईमानदारी को महत्त्व देते थे। इसलिए सभी देवता और ऋषि- मुनि भी महाराज हरिश्चन्द्र का आदर और सम्मान करते थे।          एक बार सभी देवता ऋषि-मुनियों ने विचार किया कि महाराज .....
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10. घमंडी का सिर नीचा

[ सितम्बर 2014 | संपादक द्वारा लिखित ]
एक जंगल में बाँस का पेड़ और एक जामुन का पेड़ पास-पास थे। जामुन का पेड़ बाँस के पेड़ की अपेक्षा बहुत मजबूत था। बाँस का पेड़ बहुत पतला होने के साथ-साथ बहुत लचीला भी था। हवा का रुख जिस ओर होता बाँस का पेड़ उसी दिशा में झुक जाता था। एक बार जामुन के पेड़ ने बाँस के पेड़ का उपहास करते हुए कहा―‛तुम तो हवा की आज्ञा का हमेशा .....
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11. बिल्ली के गले में घंटी

[ अगस्त 2014 | संपादक द्वारा लिखित ]
एक बहुत बड़े घर में सैकड़ों चूहे रहते थे। वे चारों ओर उछल-कूद करते हुए अपना पेट आराम से भर लेते थे और फिर जब उन्हें खतरा दिखाई देता तो बिल में जाकर छिप जाते थे। एक दिन उस घर में न जाने कहाँ से एक बिल्ली आ गई। बिल्ली की नज़र जैसे ही चूहों पर पड़ी तो उसके मुँह में पानी आ गया। बिल्ली ने उन चूहों .....
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12. जैसे को तैसा

[ जुलाई 2014 | संपादक द्वारा लिखित ]
लोमड़ी के कारनामों से भरपूर हमने अनेक कहानियाँ पढ़ी हैं। लोमड़ी हमेशा कुछ- न - कुछ बुरा ही करने की सोचती है। एक बार लोमड़ी ने सारस को अपने घर भोज जा निमंत्रण दिया। सारस ने ख़ुशी-ख़ुशी लोमड़ी का निमंत्रण स्वीकार कर लिया। सारस ने मन-ही-मन एक विशेष प्रकार के भोज के सपने देखने आरम्भ कर दिए। .....
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13. करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान

[ जून 2014 | संपादक द्वारा लिखित ]
 एकलव्य एक नीची जाति का बालक था। वह अपने माता-पिता के साथ जंगल में रहता था। वह प्रतिदिन चारे की खोज में अपने पिता के साथ जंगल में जाता था। एकलव्य के पिता खंजर से शिकार करते थे। एकलव्य भी खंजर से अभ्यास करने के लिए जंगल में जाते थे। एकलव्य के लिए यह एक कठिन काम था। पत्थरों से छोटे-छोटे जीवों पर निशाना साधना .....
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14. जैसा करोगे वैसा भरोगे

[ मई 2014 | संपादक द्वारा लिखित ]
          एक बुढ़िया थी। उसका एक ही बेटा था। वह हमेशा यही सपने देखती थी कि उसके बेटे का विवाह होगा तो बेटा और बहू दोनों मिलकर उसकी बहुत सेवा करेंगे और उसे घर का भी काम नहीं करना पड़ेगा। धीरे-धीरे वह दादी बन जाएगी और उसका घर स्वर्ग बन जाएगा।           आखिर वह दिन .....
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15. सेर पर सवा सेर

[ अप्रैल 2014 | संपादक द्वारा लिखित ]
  एक बार अपनी समस्याओं पर विचार करने के लिए बहुत सारे खरगोश एक स्थान पर इकट्ठा हुए। एक खरगोश ने कहा-'हम सभी जीवों से अधिक सुन्दर हैं। हमें खूंखार जानवर, पशु-पक्षियों से हमेशा अपनी जान का खतरा बना रहता है। हमसे कोई भी नहीं डरता लेकिन हम सबसे डरते हैं। मनुष्य भी हमारा मांस .....
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