क्या आप जानते हैं?

1:- हर तरफ मंदिर ही मंदिर

      मध्य बर्मा (म्याँमार) में पागान नामक स्थान में आनंद मंदिर को आश्चर्य ही कहा जाता है। सन 1090 ई. में जब इस मंदिर का निर्माण पूरा हुआ तो वहाँ के राजा ने उसके शिल्पकार को सूली पर लटका दिया ताकि वह ऐसा मंदिर कहीं और न बना सके।

      उस समय पागान एक शक्तिशाली साम्राज्य की राजधानी था। बौद्ध राजाओं ने भी मंदिर निर्माण को बढ़ावा दिया और म्याँमार के हर नागरिक का सपना था कि वह अपने जीवन काल में एक मंदिर जरुर बनवाए। फिर तो वहाँ इतने मंदिर बन गए कि फसलें उगाने के लिए भी जगह नहीं बची। शहर को गरीबी और अराजकता ने घेर लिया और अंत में 1287 ई. में मंगोलों ने शहर पर अधिकार कर लिया।

 

2:- क्रिसमस वृक्ष

    क्रिसमस पर ईसाई  धर्म के अनुयायी क्रिसमस वृक्ष को सजाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह परम्परा जर्मनी से शुरू हुई। 8वीं शताब्दी में बोनिफेस नामक एक अंग्रेज धर्म प्रचारक ने इसे शुरू किया। इसके बाद सन 1912 में एक बच्चा जिसका नाम जोनाथन था, वह बहुत बीमार था, उसके अनुरोध पर उसके पिता ने क्रिसमस वृक्ष को रंगबिरंगी पत्तियों और पन्नियों से सजाया।

     सदाबहार फर को क्रिसमस वृक्ष के रूप में सजाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब ईसा का जन्म हुआ तो देवता उन्हें बधाई देने पहुँचे। उन्होंने सदाबहार वृक्ष को सितारों से सजाकर अपनी ख़ुशी जाहिर की। इंग्लैण्ड में क्रिसमस वृक्ष के ऊपर देवता की प्रतिमा भी लगी जाती है।

      संसार का सबसे बड़ा क्रिसमस वृक्ष उत्तरी कैरोलिना के हिल्टन नामक पार्क में है। इस वृक्ष की ऊँचाई 90 फुट है तथा इसकी परिधि 110 फुट से ज्यादा है।

 

3:- अजंता की गुफाएँ

     अजंता की गुफाएँ औरंगाबाद में अजन्ता नामक गाँव से 5 km की दूरी पर जंगलों के बीच स्थित है। ये गुफाएँ ताप्ती नदी की एक सहायक नदी वधोरा के तट पर बनायी गई है। इन गुफाओं का निर्माण अर्द्धवृत्ताकार पहाड़ी ढाल पर किया गया है। जिसकी ऊँचाई 75 मीटर है। इन गुफाओं को घोड़े के नाल की आकृति वाले क्षेत्र में व्यवस्थित किया गया है जो 550 मीटर की लम्बाई में फैला है। गुफाओं के फर्श की सतह अलग-अलग गुफा में अलग- अलग ऊँचाई पर है। शुरू-शुरू में सभी गुफाएँ एक-दूसरे से अलग थीं, परन्तु बाद में उन्हें सीढ़ियों से जोड़ दिया गया।

 

4:- मकड़ियाँ

    ज्यादातर मकड़ियाँ मनुष्यों के लिए खतरनाक नहीं होती हैं, क्योंकि उनके जहरीले दाँत काफी कमजोर होते हैं और वह मनुष्य की त्वचा को छेद नहीं सकती हैं। लेकिन ब्लैक विडो जैसी कुछ मकड़ियाँ मनुष्य के लिए खतरनाक हो सकती हैं। 

    वैसे मकड़ियाँ मनुष्यों के लिए काफी उपयोगी हैं क्योंकि ये फसलों को बर्बाद करने वाले कीड़ों को खा जाती हैं। न्यू गिनी के जंगलों में एक बड़े किस्म की मकड़ी पायी जाती है जिसे वहाँ के आदिवासी भूनकर खाते हैं।

     ज्यादातर मकड़ियाँ अपने शिकार को फँसाने के लिए जाले बनाती है लेकिन “येडिया मकड़ी” अपने शिकार को दौड़ाकर पकड़ती है और “थूकने वाली मकड़ी” अपने शिकार पर थूककर अपनी चिपचिपी लार से अपने शिकार को पकड़ लेती है।

 

5:- टाइटेनियम

    टाइटेनियम एक धातु है। इसकी खोज 18वीं सदी में हो गयी थी लेकिन इसे शुद्ध रूप में प्राप्त सन 1925 में ही किया गया। यह धातु वजन में हल्की, खूब मजबूत और टिकाऊ होती है। इसमें जंग भी नहीं लगता। इस धातु से पानी के जहाज, हवाई जहाज, औजार और अंतरिक्षयानों को बनाया जाता है। यह काफी महँगी धातु है।


लेखक परिचय :
मोहम्मद इमरान खान
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