ISSN 2350-1014
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अंक जनवरी 2015

सुविचार:- “रहे भावना ऐसी मेरी सरल सत्य व्यवहार करूँ, जहाँ तक हो इस जीवन में औरों का उपकार करूँ।” सर्वप्रथम,  'ज्ञानमंजरी' वेब पत्रिका की ओर से आप सभी पाठकगण को नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ। नया वर्ष, नवीन सोच व जिज्ञासा से पूर्ण जीवन विकास की ओर एक और कदम। ऐसे में चलिए कुछ आत्मविश्लेष्ण की बातें कर लें। कहने को तो वर्ष, दिवसों की गणना मात्र है, फिर भी हमारे विकासक्रम का सारा लेखाजोखा इन्हीं दिवसों में उलझा रहता है। हम झट से अपने अच्छे ....