ISSN 2350-1014
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अंक जून 2014

आषाढ़ बनकर ही अधर के पास आना चाहता हूँ, मैं तुम्हारे प्राणों का उच्छ्वास पाना चाहता हूँ। आषाढ़, यानि धरती के आँचल को भिगोने की पहली तैयारी।        ग्रीष्म की विदाई का सन्देश लेकर आता है ये आषाढ़। फागुन के बाद और सावन से पहले लड़कपन और यौवन को अपने अन्दर समाहित ये माह, बारिश की नन्ही बूँदों से माटी और वातावरण को अपनी सोंधी खुशबू से भर देता है। ऐसी खुशबू जो जीवन को भी नई ताजगी से सराबोर कर जाता है।       आषाढ़ माह का प्रथम दिवस धरती ....