नव भारत निर्माण करो

देशभक्ति की अलख जगाने आया हूँ
मानव -मात्र की आत्मा झिंझोड़ने आया हूँ |
है हिम्मत तो रोक मुझे
विषमता का भेद मिटाने आया हूँ |

उठो भारत के वीर सपूतों
नव भारत निर्माण करो |
दुश्मन को उसके घर में मार
भारत का रौशन नाम करो |

उठो शहीदों की विधवाएं
खा कर कटे सर की सौगंध |
आमरण अनशन नहीं
अब भीषण रण होगा |

हत्यारों का नर-मुंड प्रांगन में अथवा
नेताओं का सर कलम होगा |
देख गरीबों पे जुल्म -अत्याचार
देश में बढ़ता भ्रष्टाचार |

आतंकवाद का होता विस्तार
नक्सलवाद का डसता अंधकार |
कर रही भारत माता पुकार | 
उठो भारत के युवा शेरों
पुनः स्वदेश निर्माण करो |

प्रेमिका के प्रीत से बाहर आ
वतन से थोडा प्यार करो |
गद्दारों के शीश काट
शमशीर की धार तेज करो |


अधिकार मिलते नहीं लिए जाते हैं
आज़ाद हैं मगर गुलामी किये जाते हैं |
शीश नवाते आये हैं अब शीश कटाने जाते हैं
माता के खातिर कुर्बानी देने जाते हैं |

उठो भारत के युवा शेरों
पुनः स्वदेश निर्माण करो
जन-जन के जीवन में
खुशियों का संचार करो

नव-युग की नूतन वीणा में
नया राग नव गान भरो


लेखक परिचय :
निवास पाठक आज़ाद
फो.नं. ---
ई-मेल - niwask3@gmail.com
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