प्रेरक विचार

आत्मा

 सूखे हुए खेत, बीज की आत्मा के लिए शरीर नहीं बन सकते।

उद्यमी

अपने कामगारों की असफलता का हर्जाना उद्यमी को चुकाना पड़ता है।

 

प्रेम

लम्बा साथ निभाने वाला प्रेम ही अधिक विश्वसनीय होता है।

 

सहनशील

सहनशील लोगों को पानी की तरह कितनी बार ही उबलिये, फिर भी पीने योग्य बने रहेंगे।

 

समस्या

जो अपनी समस्याओं में ही उलझे हुये हैं, उन्हें दूसरों की समस्या कभी दिखलाई नहीं देती है।

 

चतुराई

गुणों का होना एक बात है, लेकिन उनका चतुराईपूर्ण इस्तेमाल उससे बड़ी बात है।

 

व्यवसाय

जब फायदा खुश होकर देखा जाता है और नुकसान आँखें बंद करके; यही व्यवसाय की विफलताका कारण बन जाता है।


लेखक परिचय :
डॉ. नरेश अग्रवाल
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