बेटी

       बेटी

मेरी भी जमी है , है मेरा आसमा ,

मुझे भी जीने का अधिकार चाहिए

माँ-पापा आप दोनों का थोड़ा सा प्यार चाहिए ।

न तोड़िए मुझे मैं नाजुक सी गुड़िया हूँ,

मुझे भी माँ के आँचल से लिपटने का अधिकार चाहिए

माँ-पापा आप दोनों का थोड़ा सा प्यार चाहिए ।

बेटी हूँ तो क्या , बेटे से कम नही

तेरे साये में हूँ तो कोई भी गम नहीं

न छोड़ो मुझे , इस अंधेरे में अकेला

मुझे भी , उजालों का संसार चाहिए

माँ-पापा आप दोनों का थोड़ा सा प्यार चाहिए ।

न धन – न दौलत , पर मुझे अधिकार चाहिए

मैं अंश हूँ आप दोनों के अंग का

मुझे ममता के साये में रहने का अधिकार चाहिए

माँ-पापा आप दोनों का थोड़ा सा प्यार चाहिए ।

न छोड़िए अकेला मुरझा जाऊँगी मैं

फूल हूँ , मुझे भी महकने का अधिकार चाहिए

माँ-पापा आप दोनों का थोड़ा सा प्यार चाहिए ।


लेखक परिचय :
विशाल वर्मा लखनवी
फो.नं. -7836898542
ई-मेल - ccivishdem@gmail.com
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