विद्युत् चुम्बकीय सिद्धांत के जनक―"जेम्स क्लर्क मैक्सवेल"

 'जेम्स क्लर्क मैक्सवेल' का नाम भौतिकी वैज्ञानिक के साथ-साथ गणितज्ञ के रूप में भी प्रसिद्ध है, भौतिक और गणित में उनका कार्य न्यूटन एवं आइन्स्टाइन के समकक्ष समझा जाता है, जेम्स क्लर्क मैक्सवेल का जन्म 13 नवम्बर 1831 को एडिनबर्ग इंग्लैंड में हुआ था, उनके पिता का नाम जॉन क्लर्क मैक्सवेल था और माता का नाम फ्रान्सिस के. था, उनके पिता मशहूर वकील थे, वे जेम्स को बचपन में खेलने के लिए ढेर सारे खिलौने लाकर देते थे। इनमें एक खिलौना था स्ट्रीबोस्कोप, जो आईने के सामने गोल घुमता हुआ तरह-तरह के चित्र दिखता था, नन्हें-मुन्ने जेम्स को स्ट्रीबोस्कोप खिलौने से खेलते हुए भविष्य में वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा मिली।
      जेम्स नौ साल के थे तब उनकी माँ का निधन हो गया। शुरू में जेम्स को घर में पढ़ाने के लिए शिक्षक आते थे। बाद में उन्हें एडिबर्ग अकेडेमी स्कूल में भेजागया। यहाँ उनके दोस्त कम थे इसलिए जेम्स अपना समय पढ़ने के साथ-साथ विज्ञान की आकृति बनाने में बिताया करते थे, यहाँ उन्हें गणित पढ़ाने के लिए 'जेम्स गलोग' नाम के शिक्षक थे। जेम्स मैक्सवेल को गणित में रूचि थी एवं 1845 में मैक्सवेल को मैथमेटिक्स में मेडल के साथ स्कालरशिप भी मिल गई। उस वक्त उनकी उम्र केवल 14 साल थी।उम्र के पन्द्रहवें साल ही में उन्होंने ' मैथमेटिक्स ऑफ़ ओवल कर्व' पर अपना शोध प्रकाशित किया एवं उसे रॉयल सोसाइटी ऑफ़ एडिनबर्ग में पढ़ा। सन 1850 में जेम्स मैक्सवेल ने इंग्लैंड के ट्रिनिटी कॉलेज में गणित छात्र के रूप में दाखिला लिया। यहाँ मैक्सवेल ने सभी इम्तिहान अच्छे अंक लेकर पास किये।
         सन1855 में मैक्सवेल ट्रिनिटी कॉलेज के सभासद चुने गए। 1856 में वे सबर्डीन के मैरिरचल कॉलेज में प्रोफेसर बन गए। यहाँ उन्होंने ' विद्युत् और चुम्बक' पर अपना खोज कार्य शुरू किया। उन्होंने सन 1857 में शनि ग्रह पर एक शोध प्रकाशित किया।खगोल विज्ञान में मैक्सवेल की यह महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
        सन 1857 जेम्स मैक्सवेल ने मेरी कैथरीन नामक युवती से शादी की। मेरी कैथरीन के पिता  कॉलेज के प्राचार्य थे एवं जेम्स मैक्सवेल को इसी कॉलेज में भौतिकी विज्ञान के प्रोफ़ेसर की नौकरी मिल गई। जेम्स मैक्सवेल की शादी सफल रही, लेकिन उन्हें कोई संतान नहीं हुई। सन 1860 में उन्हें लंदन शहर के किंग्स कॉलेज में भौतिकी एवं खगोल विज्ञान विभाग में प्रोफेसर बनाया गया। सन 1865 में उन्होंने विद्युत् नापने की स्टैण्डर्ड पद्धति विकसित की, किंग्स कॉलेज में वे छात्रों को भौतिकी विज्ञान पढ़ाने के साथ-साथ अपने खोज कार्य में भी जुटे रहे। प्रयोग के द्वारा उन्होंने साबित किया कि विद्युत् चुम्बकीय क्षेत्र की गति प्रकाश गति के बराबर आती हैं। इससे उन्होंने  यह अनुमान लगाया कि प्रकाश तत्व विद्युत् चुम्बकीय प्रणाली का पालन करना है।
       जेम्स मैक्सवेल की दूसरी उपलब्धि थी 'काइनेटिक थ्योरी ऑफ़ गैसेस'  इसमें वायु के अणुओं के भ्रमण एवं उनके तापमान के बारे में वैज्ञानिक जानकारी थी।
      सन 1865 में मैक्सवेल ने किंग कॉलेज की नौकरी छोड़ दी एवं अपने बूढ़े पिता की सेवा करने स्काटलैंड चले गए। यहीं पर उनका महत्वपूर्ण खोज कार्य पूरा हो सका जिन्हें हम मैक्सवेल डिफ्रेन्शियल एक्वेशन्स के नाम से जानते हैं। सन 1871 में जेम्स मैक्सवेल को विश्वप्रसिद्ध कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रायोगिक भौतिकी विज्ञान के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति मिली। उनके नेतृत्व में कहीं पर नई कैवेंडिंस प्रयोगशाला का निर्माण हुआ। यह प्रयोगशाला बनाते 

समय हेनरी कैवेन्डीश  के बीस से ज्यादा विद्युतीय गणित एवं प्रयोग के विज्ञान शोध पत्र मैक्सवेल को मिले, जिन्हें खुबसूरत ढंग से सम्पादित करके मैक्सवेल ने सन 1879 में 'दि इलेक्ट्रिकल रिसर्च ऑफ़ दि हानरेवल हेनरी कैवेन्डीश' ग्रन्थ प्रकाशित किया।
    5 नवम्बर, 1879 को 48 साल की आयु में उनका निधन हो गया।
     अलबर्ट आइन्स्टाइन अपने कार्यालय में सिर्फ एक ही तस्वीर रखते थे, वह तस्वीर थी जेम्स मैक्सवेल की। मैक्सवेल की विद्युत् चुम्बकीय किरणों की खोज से भविष्य में रेडियो लहरों की खोज हो सकी। मैक्सवेल के गणितीय सूत्रों से विज्ञान की काफी प्रगति हुई और पृथ्वी का रूप ही बदल गया।
      मैक्सवेल के सूत्र का उपयोग करके आइन्स्टाइन ने ऊर्जा, वस्तुमान एवं प्रकाशवेग के सूत्र की खोज की, मैक्सवेल के सम्मान में बीनस ग्रह के ऊँचे पर्वत का नामकरण 'मैक्सवेल माउंटन' किया गया एवं चाँद के एक हिस्से को मैक्सवेल क्रेटर नाम दिया गया।

साभार:-“विश्व के आदर्श वैज्ञानिक” 


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